रसोई में 5 प्रकार के विष जिनका सेवन हम रोज़ करते हैं | 5 Types Of Poisons In The Kitchen That We Consume Everyday

रसोई में 5 प्रकार के विष जिनका सेवन हम रोज़ करते हैं
रसोई में 5 प्रकार के विष जिनका सेवन हम रोज़ करते हैं

भारतीय रसोई का पूरे विश्व में कोई मुकाबला नहीं है हमारे पूर्वजों ने जो खाना खाने की विधि और खाना बनाने की विधि इजाद की थी इसमें बहुत सारे औषधीय गुण थे , हमारे खाने में इस्तेमाल होने वाले शुद्ध मसाले तेल घी इत्यादि भी इस्तेमाल होते थे लेकिन समय के साथ-साथ इन सब चीजों की क्वालिटी में फर्क आता गया और इन सब चीजों से हमारा स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ. भारतीय रसोई में कई चीजें ऐसी आई जो हमारी रसोई का हिस्सा नहीं थी लेकिन आज उसका इस्तेमाल बहुत ही जोरों शोरों से हो रहा है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है तो आइए जानते हैं हमारी रसोई में इस्तेमाल होने वाले पांच ऐसे पदार्थों के बारे में जो विष के बराबर हैं इनका इस्तेमाल हमें बिल्कुल भी नहीं करना है , 5 ऐसी चीज़ें जो हमारी रसोई में आज से बंद कर देनी चाहियें इनके इस्तेमाल हमरे लिए विष के सामान है 

रसोई घर के सबसे लोकप्रिय कमरों में से एक है क्योंकि यह वह जगह है जहाँ खाना पकाने और खाने का अधिकांश काम होता है। यह एक ऐसा स्थान भी है जो आपके स्वास्थ्य के लिए छिपे हुए विषाक्त पदार्थों और संभावित खतरों को शरण दे सकता है।

रसोई में पाँच प्रकार के विष – 5 Types Of Poisons In The Kitchen That We Consume Everyday

1. सफेद नमक :- सफेद नमक अत्यंत हानिकारक है। इसका अधिक सेवन भी ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, अगर आप अपने बालों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं तो सफेद नमक का इस्तेमाल न करें। सफेद नमक का ज्यादा सेवन वज़न बढ़ने एवम् पसीना अधिक निकलने के लिए जिम्मेदार होता है, अगर आपने सफाई पर ध्यान नहीं दिया तो इससे त्वचा रोग और इन्फैक्शन भी हो सकता है।

क्या करें : सेंधा एवं पाकिस्तानी नमक, काला नमक, पहाड़ी नमक का प्रयोग।

2. चीनी :- चीनी का प्रयोग आपके लिए वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों प्रकार से हानिकारक है। चीनी का निर्माण और प्रयोग भारत में अंग्रेजों ने शुरू करवाया था। इसके निर्माण में 20 खराब रसायनों का प्रयोग होता है, जो आपके शरीर में अम्ल अर्थात् एसिड बनाते हैं और हमारे पेट व पाचन क्रिया में अनेक विकार पैदा करते है, यह मधुमेह रोग पैदा करती है।

क्या करें :- गुड़, शक्कर, देशी खांड, शहद इत्यादि का सेवन करें।

3. मैदा :- मैदा बनाते समय गेहूँ के ऊपरी छिलके को हटा दिया जाता है जिससे उसका रेशा निकल जाता है। इसके सेवन से अकसर कब्ज की समस्या आती है, साथ ही मैदा बहुत अधिक मात्रा में तेल भी सोखता है, अधिक मात्रा में तेल के सेवन से भारीपन बना रहता है एवम् मैदा के ज्यादा सेवन से पेट बिगड़ जाता है।

क्या करें : आटे एवं देसी अनाजों का प्रयोग करें।

4. रिफाइन्ड :- रिफाइन्ड तेल मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर को न्योता देता है, क्योंकि इसे गन्ध रहित, स्वाद रहित व पारदर्शी बनाने के लिए कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें से कास्टिक सोडा, फासफोरस एसिड, ब्लीचिंग पाउडर आदि प्रमुख हैं।

क्या करें :- सरसों, तिल, अलसी, नारियल आदि तेलों का प्रयोग करें।

5 जर्सी गाय का दूध :- जर्सी गाय (विलायती गाय) के दूध का सेवन न करें। ए1 किस्म का दूध कैंसर, हृदय रोग, गुर्दे फेल, लिवर, गैस, अम्लता आदि जैसे भयंकर रोग पैदा करता है। इसका सम्पूर्ण बहिष्कार करें।

क्या करें : देसी नस्ल की गाय के दूध का ही सेवन करें।

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