बोध कथा : वादों को पूरा नहीं कर सकते तो वादे मत करिये 

बोध कथा : वादों को पूरा नहीं कर सकते तो वादे मत करिये

एक ठंड रात में, एक अरबपति एक बूढ़े गरीब आदमी से मिला जो उसके घर के बाहर बैठा हुआ था। उसने उस बूढ़े आदमी से पूछा, “क्या आपको ठंड नहीं लग रही है बाहर और आपने कोई कोट भी नहीं पहना हुआ है” बूढ़े आदमी ने जवाब दिया, “मेरे पास नहीं है लेकिन मुझे इसकी आदत है।”
अरबपति ने जवाब दिया, “आप यहीं रूको मैं अंदर से आपके लिए एक कोट लेकर आता हूँ।”
बूढ़ा आदमी खुश हो गया और उसने बोला, “मैं आपके वापस आने तक इंतजार करूँगा।”
इसके बाद अरबपति आदमी अपने घर में चला गया और अपने काम में व्यस्त हो गया, वह बूढ़े आदमी और कोट के बारे में भूल गया। सुबह जब उसे याद आया तो उसने उस बूढ़े आदमी की खोज करनी शुरू की पर वह आदमी ठंड की वजह से मर चुका था और उसने उस अरबपति आदमी के लिए एक खत छोड़ा था।
“जब मेरे पास कोई गरम कपड़े नहीं थे तो मेरे पास प्रतिरोध(सहने) की शक्ति थी ठंड से लड़ने के लिए क्योंकि मैं इसका आदी हो चुका था लेकिन जब आपने मुझे मेरी मदद करने का वादा किया तो मैं आपके वादे से जुड़ गया और फिर उसने मेरे सहने की शक्ति छीन ली।
सीख : अगर आप वादों को पूरा नहीं कर सकते तो वादे करिये भी मत। ये भले ही आपके लिए मतलब न रखता हो लेकिन किसी और के लिए यह सब कुछ हो सकता है।
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