बात पुरानी सीख नई | Motivational Stories for kids in hindi

बात पुरानी – सीख नई

Motivational Stories for kids in hindi – कछुए और खरगोश की कहानी हम सब जानते हैं। शर्त लगी ओर दौड़ शुरू। आगे हम सब जानते हैं-खरगोश एक अच्छी शुरूआत के बावजूद हार गया। कहानी से सीख मिलती है कि जो लगातार बिना रूके चलता है वह जीतता है। हम सब यह जानते हैं।

कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। खरगोश ने अनुभव किया कि उसका दौड़ हारने का मुख्य कारण अपने पर हद से अधिक आत्म विश्वास, लापरवाही और घमंड है।अगर उसने उस चीज को हल्के में नहीं लिया होता तो कछुआ किसी भी हालत में उसे हरा नहीं सकता था। इसलिए उसने फिर से कछुए को एक और दौड़ के लिए ललकारा। कछुआ सहमत हुआ। इस बार खरगोश ने शुरू से अन्त तक बिना रूके निरन्तरता के साथ दौड़ लगाई और कई मील के फासले से वह दौड़ जीत गया। इससे यह सीख मिलती है कि तेजी और निरन्तरता, धीमेपन को हरा सकता है। अगर आप की संस्था में दो व्यक्ति हों उनमें से एक धीमा और विश्वासी हो तथा दूसरा और उससे भी अधिक विश्वासी हो तो जो दूसरा है, वह संस्था की सीढ़ी पहले ही आपेक्षा तेजी और निरन्तरता के साथ चढ़ता जायेगा।

कहानी यहाँ भी समाप्त नहीं होती। कछुआ ने इस बार सोचा और महसूस किया कि इस प्रकार के प्रारूप से वह खरगोश को नहीं हरा सकता। उसने कुछ देर सोचा और फिर खरगोश को एक और प्रतियोगिता के लिए बुलाया थोड़े से बदले हुए रास्ते से। खरगोश राजी हो गया। दोनों ने दौड़ शुरू की। खरगोश ने तेजी और निरन्तरता को बरकरार रखते हुए दौड़ लगाई जब तक कि वह एक बड़ी नदी के किनारे तक नहीं पहुँच गया। दौड़ का अन्तिम छोर दो कि. मी. दूरी पर नदी के दूसरे किनारे पर थी। खरगोश बैठकर सोचता रहा गया करूं। तब तक कछुआ धीरे-धीरे आकर नदी में
उतरा और तैरता हुआ दूसरे छोर पर स्थित मंजिल तक पहुंच गया और दौड़ जीत गया। इससे यह सीखने को मिलता है कि अपने अंदर छिपे गुणों और फिर खेल के मैदान को अपनी क्षमता को पहचानों और फिर खेल के मैदान को अपनी क्षमता के अनुसार बदलो। अपनी क्षमता के अनुरूप काम न केवल आप की पहचान बनाता है बल्कि मौका पैदा करता है आपको आगे बढ़ने का।

इसी बीच खरगोश और कछुआ अच्छे मित्र बन चुके थे और वे एक साथ बैठकर चिन्तन करने वे लगे। दोनों ने अनुभव किया कि पिछली दौड़ और
अच्छी तरह से दौड़ी जाए लेकिन एक टीम की तरह। उन्होंने दौड़ना शुरू किया। इस बार खरगोश कछुए को नदी के किनारे तक ले गया। उसके बाद
कछुए ने भार सम्हाला और खरगोश को नदी पार कराई। दूसरे छोर पर पहुँचकर फिर से खरगोश ने कछुए को अपने ऊपर बैठा लिया और अंतिम छोर तक पहुंचाया। दोनों ने ही पहले की उपेक्षा अधिक राहत (संतुष्टि) की सांस ली।

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कहानी से सीख-व्यक्तिगत प्रतिभा तथा क्षमता अच्छी है पर जब तक आप टीम में काम करना नहीं सीखेंगे और एक दूसरे की क्षमता को काम में नहीं लगायेंगे तो आप हमेशा अपेक्षा से कम सफल होते हैं, क्योंकि परिस्थितियाँ कभी आपको ज्यादा सफल करा सकती है, तो कभी दूसरे को।

टीमवर्क परिस्थिति के अनुसार नेतृत्व पर आधारित होती है, जिसमें व्यक्ति का प्रदर्शन परिस्थिति के आगे हार मानता है और परिस्थिति नेतृत्व लेती है।

कहानी और बहुत कुछ सिखाती है। न तो कछुआ और न ही खरगोश ने असफलता से अपनी कोशिश छोड़ी। खरगोश ने तय किया अधिक मेहनत
करेगा और अधिक कोशिश करेगा। कछुए ने अपनी चाल बदल दी क्योंकि उसने पहले से ही अधिक मेहनत करनी शुरू कर दी थी। जितना वह कर सकता था।

जीवन में कभी असफलता में अधिक मेहनत करनी शुरू कर दी थी। जितना वह कर सकता था। जीवन में कभी असफलता में अधिक मेहनत करनी पड़ती है कभी चतुरता में तो कभी दोनों को काम में लाना पड़ता है, तभी सफलता मिली सकती है।

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