प्रेरक प्रसंग : मातृभाषा और स्वामी विवेकानंद

swami vivekananda aur matrabhasha

मातृभाषा का सम्मान – स्वामी विवेकानंद

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आजकल एक हिंदी भाषा को लेकर इंटरनेट पर नई तरह की जंग देखने को मिल रही है, कोई कहता है मेरी भाषा अच्छी है कोई कहता है हिंदी भाषा अच्छी है, लेकिन अगर में आपसे ये पूछूं की आपको अपनी दोनों आँखों में से कौन सी प्यारी है जवाब आप जानते ही हैं।  भारतवर्ष से प्यार करने वाला व्यक्ति उसके लिए हिंदी भाषा उतनी ही प्रिय होगी जितनी उसकी मातृभाषा, इसमें हिंदी भाषा के पक्ष और विपक्ष के दोनों गुटों का ही नुक्सान है।

इस पर टिप्पणी देने से पहले आप स्वामी विवेकानंद की सच्ची घटना (swami vivekananda real life story) पढ़ें। बात तब की है जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका गए और भारत देश का नाम रोशन किया। अँग्रेज़ स्वामी विवेकानंद जी से बहुत प्रभावित थे हर व्यक्ति उनसे बात करनी चाहता था। ये सच्ची घटना 1899 की है स्वामी विवेकानंद लॉस एंजिलिस में थे, स्वामी जी से एक अमेरिकी व्यक्ति ने पूछा हाउ आर यू स्वामी जी ?” स्वामी विवेकानंद जी ने जवाब दिया “मैं बिलकुल अच्छा हूँ”. चूँकि स्वामी जी भगवा चोला पहने साधारण दिखने वाले संत थे, तो अंग्रेज़ ने उनके हिंदी के जवाब देने पर सोचा शायद स्वामी विवेकानंद जी को इंग्लिश नहीं आती होगी।अंग्रेज थोड़ी बहुत हिंदी जानता था तो उसे दोबारा पूछा “आपको भारत से अमेरिका आकर कैसा लगा?”.

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा “आई एम फीलिंग गुड, योर कंट्री इज वैरी ब्यूटीफुल” अमेरिकी ने बड़ी हैरानी से स्वामी जी से पूछा जब मैंने आपको अंग्रेजी में पूछा आपने हिंदी में जवाब दिया, जब मैंने आपसे हिंदी में पूछा तो आपने इंग्लिश में जवाब दिया, मुझे कुछ समझ नहीं आया। स्वामी जी ने बड़ी शांति और मुस्कुराते हुए कहा “जब आप अपनी मां (अंग्रेजी) का सम्मान कर रहे थे, तब मैं अपनी मां (हिंदी) का सम्मान कर रहा था, किंतु जब आपने मेरी मां का सम्मान किया तब मैंने भी विनम्रतापूर्वक आपकी मां का सम्मान किया” 

तक़रीबन 123 साल पुरानी ये घटना है, लेकिन स्वामी जी जो बात कहना चाह रहे थे वो आज भी हमें समझ नहीं आई है, इस बात को जितनी जल्दी हम समझ लेंगे उतनी जल्दी हम अपने देश, राष्ट्र और राज्यों के लिए अच्छे भविष्य का निर्माण कर पाएंगे। हमें ये आज समझना होगा की राजनीति के धुरंदर द्वारा हमें टुकड़ों में बांटा जा रहा है और एक दिन भारत जाति, धर्म, भाषा, रंग और क्षेत्र के नाम पर बँटा हुआ मिलेगा। भारत के उज्जवल भविष्य के लिए  हमें अपनी बुद्धि से इन घूणों को ख़त्म करना होगा। जय हिन्द जय भारत। 

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