Dussehra 2022 : दशहरा असत्य पर सत्य की जीत

Dussehra 2022 : शौर्य का पावन पर्व विजयदशमी 

Dussehra
Dussehra – शौर्य का पावन पर्व विजयदशमी 

Vijayadashami / Dussehra / Navaratri 2022 

दशमी के दिन ही भगवान श्रीराम ने रावण को पराजित किया था और उस पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए दशहरा पर्व को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। ‘दशहरा’ शब्द भी संस्कृत से लिया गया है। ‘दश’ का अर्थ दशानन यानि 10 मुख वाले रावण से है और ‘हारा’ का संबंध उस हार से है जो रावण को श्री राम से प्राप्त हुई थी। इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है।

माँ दुर्गा ने राक्षस महिषासुर के साथ उसके पापों के लिए उसे दंडित करने के लिए एक भीषण युद्ध किया, जो नौ दिन और नौ रात तक चला। इसलिए दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध किया। नवरात्रे काल में योद्धा शक्ति की पूजा प्राचीन काल से करते आ रहे हैं। 

विजय दशमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है

विजय दशमी (दशहरा) सिर्फ एक त्योहार नहीं है, यह असत्य पर सत्य की जीत, साहस, निस्वार्थ मदद और दोस्ती का प्रतीक है। यह त्योहार यह संदेश देता है कि अच्छाई की हमेशा बुराई पर जीत होती है। इसे समझाने के लिए दशहरे के दिन रावण का प्रतीकात्मक पुतला जलाया जाता है। अगर हम इस त्योहार के सामाजिक महत्व की बात करें तो यह त्योहार खुशियों और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। रावण से युद्ध के दौरान भी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए दशहरा को शस्त्र पूजा से भी जोड़ा जाता है।

रामायण की शिक्षा 

पवित्र रामायण हमें सिखाती है कि झूठ और बुराई की ताकतें कितनी भी बढ़ जाएं, अच्छाई के सामने उनकी मौजूदगी एक न एक दिन अदृश्य और नष्ट हो ही जाएगी। न केवल मनुष्य बल्कि ईश्वर भी इस अंधकार के संकट का शिकार हुए हैं, लेकिन सत्य और अच्छाई ने हमेशा सही व्यक्ति का साथ दिया है। भगवान श्री राम के 14 साल के वनवास के दौरान, भगवान राम ने  रावण का वध किया था। भगवान राम और उनकी सेना ने माता सीता को रावण की लंका से मुक्त करने के लिए दस दिनों तक युद्ध किया, जिसमें रावण की मृत्यु हो गई।

दशहरा के पर्व की प्रेरणा 

दशहरा का पर्व काम, क्रोध, लोभ, मद्यपान, मोह, मद्यपान, अभिमान, आलस्य, हिंसा और चोरी दस पापों को त्यागने की प्रेरणा देता है। दशहरा भारत के उन त्योहारों में से एक है, जिसे देखकर ही रोमांच पैदा हो जाता है। बड़े-बड़े पुतले और झांकी इस पर्व का मुख्य आकर्षण हैं। लोग रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के रूप में बुरी ताकतों को जलाने का संकल्प लेते हैं।

 दशहरे पर देवी की पूजा 

दशहरा आज भी लोगों के दिलों में भक्ति जगा रहा है। यह देश के हर हिस्से में मनाया जाता है। बंगाल में, यह देवी दुर्गा की पूजा के लिए सबसे अच्छे समय में से एक माना जाता है। बंगाल में लोग 5 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करते हैं, जिसमें चार दिनों का अलग ही महत्व है। ये पूजा के 7वें, 8वें, 9वें और 10वें दिन होते हैं, जिन्हें क्रमशः सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के नाम से जाना जाता है।

दसवें दिन मूर्तियों को निकाल कर गंगा में विसर्जित कर दिया जाता है। गुजरात में गरबा, हिमाचल में कुल्लू का दशहरा पर्व देखने लायक है। दशहरे पर तीन पुतले जलाने के बाद भी हम अपने मन से झूठ, पाखंड और धोखे को दूर नहीं कर सके। हमें दशहरे के वास्तविक संदेश को अपने जीवन में लागू करना है, तभी इस पर्व को मनाने का अर्थ सार्थक होगा।

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